जिलाधिकारी कार्यालय में दिखा भावुक नजारा
अवध दीक्षित द बैनर न्यूज़
कानपुर। किसी की खाली गोद भर जाए और सूने आंगन में किलकारियां गूंज उठें तो उस परिवार के लोगों को एक अलगसुख की अनुभूति है। कुछ ऐसा ही सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय में दिखा। जब जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने तीन दंपत्तियों को दत्तक ग्रहण आदेश का प्रमाणपत्र सौंपा तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो उठीं। जिन घरों में बरसों से इंतजार था वहां अब बच्चों की किलकारियां गूंजेंगी।
बताया गया कि तीनों दंपत्तियों ने वर्ष 2021 में आवेदन किया था। सभी औपचारिकताओं के बाद अगस्त 2025 में फी-फॉस्टर केयर एडॉप्शन कमेटी के निर्णय पर निर्धारित शुल्क जमा कर बच्चों को अस्थायी रूप से सौंपा गया।
जिन बच्चों को नए घर मिले उनमें नवजात परी को नजीराबाद थाने के अंतर्गत लावारिस पाया गया था। जबकि, नवजात करन कोतवाली क्षेत्र से निराश्रित अवस्था में मिला वहीं, नवजात सोना अनवरगंज रेलवे स्टेशन पर अकेली मिली थी। इन तीनों बच्चों को बाल कल्याण समिति के आदेश से स्वरूप नगर स्थित राजकीय विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण इकाई/बालिका गृह में रखा गया। वहीं से इनकी देखरेख हुई और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर इन्हें स्वतंत्र घोषित किया गया।
सोमवार को ये तीनों नए परिवारों की धरोहर बन गए। इसमें जहां तीन मासूमों को ममता और स्नेह मिला वहीं तीन दंपत्तियों को जीवन का सबसे बड़ा उपहार।
*मासूमों को इन्होंने दी ममता की छांव*
हैदराबाद के प्रवीण कुमार दीवान जी और लता श्रीवास्तव ने परी को गोद लिया। अब उसका नया नाम रायिनी रखा गया है।
धनबाद (झारखंड) के दिनेश कुमार तिवारी और अनामिका तिवारी ने करन को गोद लिया। जिसका नाम रखा गया आयांस तिवारी। और जयपुर के भीमराज और मीना देवी ने सोना को गोद लिया। जिसे अब वान्या नाम मिला है।
इस दौरान भावनाओं से भरे पल देखने को मिले। जब लता श्रीवास्तव ने नन्हीं रायिनी को सीने से लगाया तो उनकी आंखें छलक पड़ीं। वहीं, मीना देवी ने वान्या का माथा चूमा, तो दिनेश तिवारी ने आयांस को गोद में भरकर कहा कि आज हमारा घर पूरा हो गया।
अंतिम आदेश हेतु आज 27 अक्तूबर को जिलाधिकारी कार्यालय में साक्षात्कार हुआ और आदेश जारी कर दिया गया। इस दौरान अपर जिलाधिकारी नगर डॉ.राजेश कुमार तथा जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास कुमार भी मौजूद रहे।

