रिपोर्ट,, निरंजन मिश्र
धर्मनगरी चित्रकूट में धनतेरस से आरंभ हुए पांच दिवसीय दीपदान मेले का उल्लास चरम पर है। दीपावली की अमावस्या के एक दिन पूर्व छोटी दीपावली (नरक चतुर्दशी) पर मंदाकिनी नदी के तट और रामघाट दीपों की जगमग रोशनी से अलौकिक हो उठा।देशभर से आए श्रद्धालुओं ने दीपदान कर सुख-समृद्धि की कामना की।रामघाट,मंदाकिनी तट,हनुमान धारा,सती अनुसुइया,गुप्त गोदावरी और कामदगिरि परिक्रमा क्षेत्र श्रद्धालुओं से भर गए। श्रद्धालुओं ने पहले मंदाकिनी में डुबकी लगाई और फिर दीपदान किया। दीपों की छटा से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक आभा में मंडित हो गया। श्री चित्रकूटधाम तीर्थ विकास परिषद द्वारा बीते तीन वर्षों से मेले की भव्यता में और इजाफा किया गया है।
प्रशाशन ने चित्रकूटधाम कर्वी स्टेशन से लेकर रामघाट और कामदगिरि तक पूरे क्षेत्र को दिव्य स्वरूप में सजाया। विशेष सजावट के साथ 13 एलईडी तोरण द्वार और प्रमुख चौराहों की भव्य सजावट ने रात्रिकाल में दिन जैसा दृश्य उपस्थित किया। डीएम शिवशरणप्पा जीएन और एसपी अरुण कुमार सिंह ने मेला क्षेत्र की कई बार निगरानी की। एडीएम, एसडीएम, एएसपी, सीओ समेत प्रशासनिक अधिकारी लगातार भ्रमण पर रहे। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एलआईयू की टीमें सादी वेशभूषा में तैनात थीं।
पूरे क्षेत्र में 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, वहीं ड्रोन से भी निगरानी की गई। जल पुलिस, सिविल पुलिस, यातायात पुलिस और मेटल डिटेक्टर से सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस बार बेहतर ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया। बसों, जीप, कार, ई-रिक्शा और बाइक के लिए अलग-अलग पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए, वहीं पैदल श्रद्धालुओं के लिए वन-वे मार्ग बनाया गया। इस सुव्यवस्था के चलते श्रद्धालुओं को बिना किसी कठिनाई के दर्शन और दीपदान का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
दिगम्बर अखाड़ा के महंत दिव्यजीवन दास ने बताया कि जब त्रेतायुग में भगवान राम लंका विजय कर चित्रकूट आए थे उस दिन अमावस्या थी और उनके आने पर स्थानीय लोगों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था और माता सीता ने भी पूरे चित्रकूट को दीपमालिका से प्रकाशित किया था। तभी से दीपावली की परंपरा यहां विशेष रूप से मनाई जाती है। चित्रकूट की यह परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है, जितनी त्रेतायुग में थी।
हालांकि अमावस्या तिथि दो दिन की होने से मंगलवार को भी श्रद्धालुओं ने दीपदान किया।धर्मनगरी चित्रकूट ऐसा लग रहा था मानों आकाश से तारें नीचे आ गए हों।इस बार दीपोत्सव में लगभग 15 से 20 लाख श्रद्धालुओं ने भागीदारी की। मौन व्रत व देवारी नृत्य पांच दिवसीय दीपदान मेला में सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिलें। धर्मनगरी में बुंदेलखंड के प्रसिद्ध लोकनृत्य दिवारी की धूम रही दीपावली के दूसरे दिन परीवा को दिवारी नृत्य पूरा मेला क्षेत्र मयूरी नजर दिखा। मौनियों की टोली मोर पंख और लाठी के साथ नृत्य करती जगह-जगह देखी गई। दिवारी नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन भी हुआ। यह बुंदेलखंड का सबसे प्राचीन लोकनृत्य है।
पारंपरिक गधा मेला:
दीपावली पर चित्रकूट में विशाल गधा मेला भी लगता है। मंदाकिनी तट में लगने वाले गधा मेला में यूपी, एमपी समेत विभिन्न प्रांत के व्यापारी गधों को बेंचने और खरीदने आते हैं। पांच दिन में यहां पर एक करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार गधों का होता है। जिसकी तैयारी भी सतना जिला की नगर पंचायत,नयागांव ने शुरू किया है। पिछली बार एक गधा 10 लाख रुपए में बिका था।

