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ढाई सौ साल बाद भी नहीं पता कि कैसे टूटा आधा मंदिर!कहां गया शिवलिंग?

हमारे दादा, पर दादा के जमाने से ऐसा ही खड़ा यह मंदिर:ग्रामीण

तिलसड़ा गांव का फुटाहना मंदिर

गर्भग्रह में स्थापित था शिवलिंग

कानपुर से अवध दीक्षित की रिपोर्ट……….

कानपुर। जनपद की घाटमपुर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले ग्राम तिलसड़ा में दो-ढाई सदी प्राचीन मंदिर है, जो सदियों से आधा टूटा हुआ खड़ा है। स्थानीय निवासी इसे फुटाहना मन्दिर के नाम से पुकारते हैं।


लोग बताते हैं कि यह मंदिर कब और कैसे टूटा, किसी को पता नहीं है। बताया कि उनके दादा परदादा भी इसको ऐसा ही देखने की बात बताते चले आ रहे हैं।


पतारा विकास खंड क्षेत्र के तिलसड़ा गांव के दक्षिणी हिस्से में तेजपुर की ओर जाने वाले रास्ते के ठीक किनारे एक तालाब है। जिसके पूर्वी छोर पर विशाल मंदिर बना हुआ है। जो आधा टूटा हुआ है।


गांव के निवासी बुजुर्ग प्रेमचंद पाठक, जगतपाल सिंह हाडा और दिनेश चंद्र द्विवेदी (मुन्नू) ने बताया कि वह लोग इस मंदिर को ऐसा ही देखते चले आ रहे हैं। बताया कि मंदिर का आधा भाग टूट करके तालाब में गिरा था। जिसके अवशेष आज भी तालाब के अंदर पड़े हुए हैं। लेकिन यह कब गिरा था यह किसी को नहीं मालूम।


गांव के युवाओं आदित्य पाठक, वर्तमान ग्राम प्रधान सुलेखा कुशवाहा, क्षेत्र पंचायत सदस्य अजय पाठक, गजेंद्र सिंह हाडा, विमलेश और आदित्य पाठक ने बताया कि उनके दादा परदादा भी बताते हैं कि या मंदिर इसी तरह सदियों से खड़ा है।
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उन लोगों ने सुना है कि कभी इस मंदिर में आकाशीय बिजली गिरी थी। जिससे यह आधा टूटकर गिर गया था। वहीं कुछ लोगों ने बताया कि मंदिर के गर्भग्रह में शिवलिंग स्थापित था। जिसको किसी विधर्मी ने उखाड़ कर तालाब में फेंक दिया था।


बताया जाता है कि शिवलिंग उखाड़े जाने के बाद ही मंदिर का आधा भाग फटकर इस तालाब में गिर गया था। लेकिन तालाब में आज तक तमाम खोजबीन के बाद भी शिवलिंग नहीं मिला है।


ग्राम प्रधान सुलेखा देवी के पति दीपू कुशवाहा ने बताया कि इस मंदिर में कोई मूर्ति न होने और आधा फटा हुआ होने के चलते कोई जाने का साहस नहीं करता। बताया कि इसके बगल में पाथा माई देवी का मंदिर है। जिसमें लोग पूजा अर्चना करने जाते हैं।


उधर, मंदिर से कुछ दूरी पर अंबेडकर पार्क भी बनवा दिया गया है। जिसके चलते मंदिर के आसपास का इलाका हमेशा गुलजार बना रहता है।


गांव निवासी बताते हैं कि उन लोगों की याद में मंदिर जिस हालत में था उसी हालत में आज भी आधा खड़ा हुआ है। सालों से तमाम झंझावात झेलने के बावजूद फिर उसकी एक ईंट तक नहीं गिरी है। गांव वालों ने बताया कि पुरातत्व विभाग द्वारा इसे संज्ञान में लेकर इसका संरक्षण किया जाना चाहिए।