- पाल्हेपुर गांव की 164 वर्ष प्राचीन रामलीला
- बीस दिवसीय आयोजन के मजबूत स्तंभ
अवध दीक्षित
कानपुर। अतिव्यस्त जीवन में भाग दौड़ के बीच बीस दिन तक लगातार रामलीला का आयोजन और उसकी व्यवस्था किया जाना साधारण बात नहीं है। लेकिन नरवल तहसील के पांडु नदी के किनारे बसे लहुरिया काशी के नाम से मशहूर पाल्हेपुर गांव के निवासियों ने इस मिथक को तोड़ दिया है। इसी का परिणाम है कि पिछले 164 वर्षों से इस गांव में दशहरा से दीपावली तक लगातार 20 दिवसीय रामलीला का अनवरत आयोजन होता चला रहा है।
वर्तमान में व्यवस्था की कमान संभाल रहे आयोजन समिति के महामंत्री कल्यान सिंह सेंगर पिछले दो वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। वर्तमान में वह अस्पताल में भर्ती हैं। इसके बावजूद भी अस्पताल के बिस्तर से ही वह लीला की व्यवस्थाओं का संचालन कर रहे हैं, जो अपने आप में एक मिसाल है।
इसी तरह समिति के उपाध्यक्ष अनुराग दीक्षित कपिल के साथ ही 92 वर्षीय वयोवृद्ध इंजीनियर केके मिश्रा मामा जी, सरयू नाथ पांडेय, सुधा बाजपेई के अलावा युवाओं में शिवभुवन सिंह फन्नू, नकुल सिंह, प्रदुम्य पांडेय, चंद्र प्रकाश अग्निहोत्री और राजवीर सिंह भदौरिया सहित कई अन्य युवक हैं, जो लगातार 20 दिन तक सिर्फ लीला के ही प्रयोजन में अपना समय बिताते हैं।
इतना ही नहीं बीस दिवसीय इस आयोजन के लिए तीन-चार महीने पहले से ही व्यवस्थाएं और तैयारी शुरू कर दी जाती है। जिसमें लीला के पात्रों का रिहर्सल, साज सज्जा, रामलीला मैदान की व्यवस्थाओं को ध्यान में रखकर योजना बनाई जाती है।
अगर हम लीला के इतिहास पर नजर डालें तो इसकी शुरुआत ब्रह्मलीन गोविंदाचार्य महराज द्वारा कराई गई बताई जाती है। इसके बाद लक्ष्मी नारायण बाजपेई (बिट्टी बाबा), स्वर्गीय राम किशोर सिंह (बाबा जी), पूर्व ग्राम प्रधान स्व.हृदय नारायण दीक्षित और राजेंद्र कुमार बाजपेई आदि कई अन्य ने लीला को नया आयाम देने का काम किया।
रामलीला में बीते पांच दशक के दौरान जिन प्रमुख लोगों ने अपना योगदान किया है। उसमें भगवान शंकर का अभिनय करने वाले स्व.नैना प्रसाद दीक्षित, इंजीनियर केके मिश्रा ‘कात्यायन’, पूर्व अध्यक्ष आयोजन समिति स्व.राजेन्द्र कुमार बाजपेई, कृष्ण कुमार मिश्रा पूर्व उपाध्यक्ष और पूर्व लीला संचालक आचार्य स्व. मन्मथ दत्त त्रिवेदी का अतुलनीय योगदान रहा है।
फोटो- रामलीला के आधार स्तंभ।










