तुलसीपुर, बलरामपुर।
स्थानीय विकासखंड के अंतर्गत ग्रामीणों को खुले में शौच मुक्त करने के लिए गांव गांव में सामुदायिक शौचालय का निर्माण तो कर दिया गया लेकिन उनके संचालन के पर तो जवाबदेह गंभीर नहीं दिख रहे हैं। यही कारण है कि सामुदायिक शौचालय होने के बावजूद ग्रामीण लोटा उठाकर खेतो व जंगलों में जाने को विवश हैं।
ग्राम पंचायत मुडाडीह गांव में स्थित सामुदायिक शौचालय का है। जहां शौचालय बनाने के बाद भी आज तक ताला नहीं खुला। ग्राम पंचायत मुडाडीह मे सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया है। लेकिन शौचालय में ताला लटकने के कारण ग्रामीण खुले में शोच जाने को मजबूर हैं। चारों ओर गंदगी का माल लगा हुआ है। गांव के बुजुर्ग सहित बहू बेटियां डिब्बा लोटा लेकर खेत में शोचक्रिया जाने के लिए विवश हैं। परिसर में लगा हैंडपंप खराब पड़ा है। बड़ी बात यह है कि जिम्मेदारों ने शौचालय बनाने के बाद उसको देखना भी मुनासिब नहीं समझा। जबकि सामुदायिक शौचालय निर्माण करने के बाद इस समूह को हैंडोवर भी कर दिया गया है। समूह को प्रत्येक माह के लिए मानदेय भी मिलता है। लेकिन शौचालय कभी नहीं खुलते हैं। जिनके घरों में शौचालय है उनका तो ठीक है, लेकिन जिनके यहां नहीं है वे खुले में सो जाने को मजबूर है। ग्रामीणों ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में कहीं-कहीं शौचालय खुलते हैं। जिससे ग्राम पंचायत में हर घर शौचालय की योजना विफल होती नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोपी ग्राम प्रधान के लापरवाही के चलते सामुदायिक शौचालय में ताला जड़ा रहता है। बावजूद इसके जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं। इस संबंध में विकासखंड अधिकारी सुनील कुमार आर्य ने बताया कि जांच करके कार्रवाई की जाएगी।

