भारतीय शास्त्रीय संगीत सितार वादन से विद्यार्थियो को किया मंत्र मुग्ध

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द बैनर न्यूज

बांदा।भारतीय शास्त्रीय संगीत की मधुर लहरियों से भागवत प्रसाद मेमोरियल एकेडमी का प्रांगण गुंजायमान हो उठा। उत्तर प्रदेश चैप्टर, द्वारा आयोजित सितार वादन समारोह में प्रख्यात सितार वादक गौरव मजुमदार ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति से विद्यार्थियों को संगीत साधना का गहरा अनुभव कराया। उनके साथ तबला पर संगत कर रहे थे प्रसिद्ध तबला वादक विनोद मिश्रा रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कलाकारों का स्वागत विद्यालय के प्रांगण में स्थित स्कूल के मूल संस्थापक एवं संस्थापिका की प्रतिमा स्थल पर पुष्पहार अर्पित कर किया गया। संगीत रसिक विद्यार्थियों की उपस्थिति ने वातावरण को और अधिक ऊर्जावान बना दिया। कविता मैम द्वारा कलाकारों की जीवन यात्रा और उपलब्धियों का परिचय दिया गया। उन्होने संगीत का महत्व बताया। कहा की
संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा है यह मनुष्य को अनुशासन, एकाग्रता और भावनात्मक गहराई प्रदान करता है। शास्त्रीय संगीत केवल कला नहीं, बल्कि साधना है जो विचारों को पवित्र और मन को शांत करती है। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में सौंदर्यबोध, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना का विकास करते हैं।कार्यक्रम के दौरान सितार वादक गौरव मजुमदार ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि “संगीत आत्मा की भाषा है, जिसे महसूस किया जाता है, समझाया नहीं जाता।” उनकी राग प्रस्तुतियों ने पूरे सभागार को एक आध्यात्मिक शांति से भर दिया।विद्यालय के प्रधानाचार्य शिवेन्द्र कुमार ने बताया कि “यह संगीत उपासना विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रही। विद्यार्थियों ने पूरे अनुशासन के साथ कार्यक्रम का आनंद लिया और यह आयोजन उनके लिए एक यादगार अनुभव बन गया।”
अध्यक्ष शिव शरण कुशवाहा ने
कहा कि “भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी परंपरा की गहराई का प्रतीक है। विद्यार्थियों को ऐसे आयोजनों से न केवल संगीत का ज्ञान मिलता है बल्कि जीवन में संतुलन और संवेदना का भाव भी विकसित होता है।”
कार्यक्रम की सफलता में निदेशिका संध्या कुशवाहा, शैक्षणिक निदेशिका डॉ. वृंदा जिनारल, तथा संयोजक अनुपमा त्रिपाठी का विशेष योगदान रहा। विद्यालय परिवार ने संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार एवं भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह अद्भुत आयोजन संभव हो सका।
अंत में, कार्यक्रम संयोजक कविता मैम ने सभी अतिथियों, कलाकारों और विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा कहा कि संगीत आत्मा की शुद्धि का माध्यम है इसकी अनुभूति ही सच्ची शिक्षा है।