भरत मिलाप और राम के राज्याभिषेक के साथ रामलीला का समापन

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अवध दीक्षित की रिपोर्ट

कानपुर। सरसौल विकास खंड क्षेत्र के पाल्हेपुर गांव की 164 वर्ष प्राचीन बीस दिवसीय रामलीला का समापन भरत मिलाप और राम के राज्याभिषेक के साथ हुआ। इस दौरान लीला स्थल पर हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ जुटी।

        बता दें कि, पांडु नदी के किनारे बसे पाल्हेपुर गांव में दशहरा के दिन से दीपावली तक लगातार बीस दिन तक रामलीला का आयोजन होता है। यह परंपरा बीते 164 वर्षों से अनवरत जारी है। इसी कड़ी में रविवार की रात भरत मिलाप का आयोजन किया गया। जिसका समापन सोमवार की सुबह (दीपावली) के दिन राम के राज्याभिषेक और भगवान शंकर की अनूठी झांकी के साथ हुआ।

*मैं रहूं न रहूं, लीला का क्रम जारी रहे:महामंत्री*
रामलीला आयोजन समिति के महामंत्री कल्यान सिंह सेंगर बीते दो वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। इस बार की रामलीला में हालत गंभीर होने के चलते वह  सक्रियता के साथ आयोजन में शामिल नहीं हो पाए। वह अस्पताल में भर्ती रहे।
         लेकिन अंतिम दिन  अस्पताल से जबरन छुट्टी लेकर सुबह भगवान श्री राम की आरती करने पहुंचे। उनको स्टेचर पर लीला परिसर में ले जाया गया। जहां पर उन्होंने मंच पर श्री राम लक्ष्मण और सीता की आरती उतारी।
             उन्होंने अपने संबोधन में कहा की अगले वर्ष मैं रहूं या न रहूं। लेकिन लीला के आयोजन और उत्साह में कोई कमी नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह यह जिम्मेदारी नवयुवकों के कंधों पर डाल रहे हैं। उनके भावुक संबोधन से पंडाल में विराजमान दर्शकों की आंखों में आंसू आ गए।

*सिर्फ यहीं दिखती है भगवान शंकर की अनूठी झांकी*
पाल्हेपुर गांव की बीस दिवसीय रामलीला के अंतिम दिवस राम दरबार में भगवान शंकर अपने चार रूद्र गणों के साथ नृत्य करते हुए प्रकट होते हैं। और कुछ देर दरबार में रुकने के बाद अंतर्ध्यान हो जाते हैं। यह दृश्य अपने आप में अद्भुत होता है।
            आयोजन समिति के अध्यक्ष सरयू नाथ पांडेय, राजकुमार बाजपेई, वीरेंद्र कुमार वर्मा, अटल बिहारी बाजपेई, बाबूराम वर्मा, अमर बहादुर सिंह भदौरिया, अश्वनी कुमार मिश्रा, आलोक दीक्षित और विकास गुप्ता आदि ने बताया कि रामलीला में अंतिम दिन मुख्य विशेषता भगवान शंकर की अनूठी झांकी रहती है।
          बताया कि भगवान शंकर की झांकी के दर्शन उत्तर प्रदेश में सिर्फ पाल्हेपुर  गांव की रामलीला में ही होते हैं, अन्यत्र नहीं। बताया कि भगवान के राज्याभिषेक में शामिल होने के लिए जिस समय शंकर जी नृत्य करते हुए प्रवेश करते हैं, तो दर्शकों के बीच एक विशेष अनुभूति दिखती है।

*पूर्व काल से लीला से जुड़ी हैं कई हस्तियां*
बताया कि लीला के इतिहास में तमाम ऐसे लोगों का भी योगदान रहा है। जो बाद में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुए। इनमें झंडा गीत के रचयिता स्व.श्यामलाल गुप्त पार्षद, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, जौहरीलाल त्रिवेदी और स्थानीय स्तर पर कई अन्य महान हस्तियों का इस लीला से जुड़ाव रहा है।
        जबकि, वर्तमान में पूर्व विधायक लाल सिंह तोमर, अरुणा तोमर, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के अलावा विधायक अभिजीत सिंह सांगा और अन्य कई राजनेता इस लीला से जुड़े हुए हैं।

*दो महीने पहले से शुरू हो जाती है तैयारी*
पाल्हेपुर गांव की प्राचीन बीस दिवसीय रामलीला की तैयारी आयोजन से करीब दो महीने पूर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद से शुरू कर दी जाती है।
          आयोजन समिति से जुड़े मनीष मिश्रा, समिति के उपाध्यक्ष अनुराग दीक्षित (कपिल), नकुल सिंह, प्रेम पांडेय, विवेक गुप्ता, शिव भुवन सिंह सेंगर, कुशाग्र  पांडेय, चंद्र प्रकाश अग्निहोत्री, महेंद्र निषाद,  और रमाशंकर ट्रेलर सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि बीस दिवसीय आयोजन के लिए दो महीने पहले तैयारी शुरू कर दी जाती है।
        बताया कि इस दौरान लीला के पात्रों का रिहर्सल, उनकी वेशभूषा, रामलीला मैदान का सुंदरीकरण एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के साथ ही बीस दिन के आयोजन के लिए उपयोग में लाई जाने वाली वस्तुओं की व्यवस्था की जाती है।
           लीला में सभी पात्र गांव के ही रहते हैं। वहीं इतने बड़े आयोजन को विगत 164 वर्षों से अनवरत जारी रखना कोई सरल कार्य नहीं है। लेकिन भगवान श्री राम की कृपा से कभी भी कोई बाधा उत्पन्न नहीं हुई। बताया कि इसके लिए समिति की ओर से पूरी कोशिश की जाती है कि लीला सुचारू से संचालित होती रहे।