भइया दूज पर्व पर बहनों ने भाइयों को तिलक लगाकर लंबी उम्र की कामना की

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यम द्वितीया के अवसर पर लोगों ने यमुना में लगाई आस्था की डुबकी

फतेहपुर। जिले में भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक पर्व भैया दूज (यम द्वितीया) गुरुवार को बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शहर के सभी घरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की ग्राम पंचायत तक, हर ओर इस पवित्र त्योहार की धूम रही। पर्व के महत्व को देखते हुए सुबह से ही गंगा – यमुना नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। विशेषकर यमुना नदी में लोगों ने जमकर आस्था की डुबकी लगाई।
लोगों ने पवित्र नदी में श्रद्धा की डुबकी लगाई, क्योंकि यह त्योहार सीधे तौर पर यमराज और उनकी बहन यमुना की पौराणिक कथा से जुड़ा है।भैया दूज का यह पर्व भाई-बहन के निस्वार्थ प्रेम की कहानी कहता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान सूर्य देव और उनकी पत्नी संज्ञा (छाया) के पुत्र यमराज और पुत्री यमुना थे। यमुना अपने भाई यमराज से असीम स्नेह करती थीं और उन्हें बार-बार अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित करती थीं। यमराज, जो प्राण हरने के अपने कार्य में व्यस्त रहते थे, अक्सर अपनी बहन के निमंत्रण को टाल देते थे। आखिरकार, कार्तिक शुक्ल द्वितीया के शुभ दिन, यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर पहुँचे। यमुना ने अपने भाई का अत्यंत आदर-सत्कार किया और उनके लिए तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए। बहन की सेवा और स्नेह से अभिभूत होकर यमराज ने यमुना से वरदान मांगने को कहा। यमुना ने वरदान मांगा कि जो भी भाई इस पावन तिथि पर अपनी बहन के घर जाएगा, उससे तिलक करवाएगा और उसके हाथ का बना भोजन ग्रहण करेगा, उसे यमराज का भय नहीं होगा और वह अकाल मृत्यु से मुक्त रहेगा। यमराज ने अपनी प्रिय बहन को यह वरदान सहर्ष प्रदान किया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि भाई दूज के दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक करके उनकी लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करती हैं। यह पर्व न केवल भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करता है, बल्कि उन्हें यमलोक के भय से मुक्ति का आश्वासन भी देता है।